ISSN No: 2231-5063
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Article Name :
वीर रस के कवि भूषण
Author Name :
सुब्राव नामदेव जाधव
Publisher :
Ashok Yakkaldevi
Article Series No. :
GRT-7164
Article URL :
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Abstract :
रस की दृष्टि से रीति या शृंगार काल में शृंगार के बाद वीर-रस का स्थान है| आचार्य शुक्ल भी स्वीकार कर चुके हैं कि- “वास्तव में शृंगार और वीर इन्हीं दो रसों की कविता इस काल में हुई है|”
Keywords :
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